वायरल पत्र पर प्रपंच,विधायक अरविंद पांडेय की सफाई या सियासी डैमेज कंट्रोल?

देहरादून।
राजनीति में जब अपनी ही पार्टी के भीतर से ‘लेटर बम’ फूटता है, तो उसकी गूँज बहुत दूर तक जाती है। उत्तराखंड भाजपा के कद्दावर नेता और विधायक अरविंद पांडेय इन दिनों एक ऐसे ही ‘शिकायती पत्र’ को लेकर सुर्खियों में हैं।
कल तक जिस पत्र ने सोशल मीडिया पर हड़कंप मचा रखा था, आज उसी पर सफाई देने के लिए विधायक जी को खुद भाजपा कार्यालय में मोर्चा संभालना पड़ा। चलिए जानते हैं क्या है ये पूरा ‘लेटर कांड’ और पांडेय जी ने इस पर क्या सफाई दी है।
*क्या था मामला?*
पिछले कुछ दिनों से अरविंद पांडेय के नाम से एक शिकायती पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें भ्रष्टाचार और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। इस पत्र ने भाजपा के भीतर चल रही ‘भीतरी कलह’ को सरेआम कर दिया था। अरविंद पांडेय की सफाई आज देहरादून स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए अरविंद पांडेय ने साफ लहजे में कहा कि यह पत्र पूरी तरह से फर्जी और कूटरचित है। उन्होंने इसे अपनी छवि खराब करने की साजिश करार दिया। विपक्ष पर ठीकरा फोड़ते हुए हमेशा की तरह, विधायक जी ने अपनी पार्टी की अंतर्कलह को छिपाने के लिए विपक्ष का सहारा लिया।
लेकिन सवाल यहाँ ये खड़ा होता है कि अगर ये पत्र फर्जी है, तो आखिर इतनी बारीकी से विधायक जी के नाम का इस्तेमाल करने की हिम्मत किसने की? क्या ये वाकई विपक्ष की चाल है, या फिर भाजपा के अंदर ही अंदर ‘गुटबाजी’ का लावा अब बाहर निकलने लगा है?
अक्सर देखा गया है कि जब भी भाजपा के भीतर से कोई आवाज उठती है, उसे ‘फर्जी’ या ‘साजिश’ बताकर दबा दिया जाता है। लेकिन जनता पूछ रही है— क्या अरविंद पांडेय की ये सफाई महज एक ‘डैमेज कंट्रोल’ है?
वंही पाण्डे की प्रेसवार्ता के तुरन्त बाद एकबार फिर कांग्रेस अध्यक्ष गोदियाल ने पत्र पूरी तरह सही होने का दावा करते हुए कहा भाजपा विधायक ने ई मेल के जरिये प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा है अगर पत्र गलत है तो सरकार जाँच कराएगी और पत्र में जो आरोप लगाए गए है वो सही होने पर कार्यवाई करेगी। गणेश गोदियाल, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस




