उत्तराखंड

देहरादून, विकासनगर और ऋषिकेश तहसील के रिकॉर्ड रूम सील, जांच शुरू

सब रजिस्ट्रार कार्यालय में अभिलेखों से छेड़छाड़ और फाइल बदलने के मामले में देहरादून, विकासनगर और ऋषिकेश तहसील के रिकॉर्ड रूम की जांच शुरू कर दी गई है। डीएम सोनिका के आदेश पर तीनों तहसीलों के रिकॉर्ड रूम सील कर दिए गए। वहीं, देहरादून में सब रजिस्ट्रार ऑफिस के रिकॉर्ड रूम को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया गया। एसडीएम या एडीएम की अनुमति के बिना कोई कर्मचारी रिकॉर्ड रूम में प्रवेश नहीं कर सकेगा।

गौरतलब है कि सब रजिस्ट्रार ऑफिस के रिकॉर्ड रूम से बैनामों की मूल फाइल गायब करने और कई फाइलों में दस्तावेज बदलने के मामले में तीन दिन पहले पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मामले की एसआईटी जांच के आदेश दिए थे। इससे इतर प्रशासनिक कार्रवाई भी जारी है। सोमवार को डीएम सोनिका ने एडीएम (वित्त) रामजीलाल शर्मा के साथ विकासनगर तहसील स्थित रजिस्ट्री ऑफिस के रिकॉर्ड रूम का निरीक्षण किया। वहीं, एडीएम (प्रशासन) डॉ. एसके बरनवाल ने देहरादून सब रजिस्ट्रार ऑफिस में निरीक्षण कर रिकॉर्ड रूम की सुरक्षा का जायजा लिया। उन्होंने बताया, रिकार्ड रूम में सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम पूरा कर लिया गया है।

रिकॉर्ड रूम को सील करते हुए निर्देश दिए गए कि कोई भी कर्मचारी बगैर एडीएम की अनुमति के कोई भी दस्तावेज नहीं छुएगा। रिकॉर्ड रूम को सील करते हुए प्रवेश पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है। वहीं, डीएम के निर्देश पर ऋषिकेश और विकासनगर में भी रिकॉर्ड रूम सील किए गए हैं। निर्देश दिए गए हैं कि संबंधित एसडीएम की अनुमति के बगैर रिकॉर्ड रूम से संबंधित कोई भी कार्य कर्मचारी नहीं करेंगे।

फोरेंसिक जांच से खुलेंगी रिकॉर्ड रूम में गड़बड़ी की परतें
रिकॉर्ड रूम में अभिलेखों को बदलने और उनसे छेड़छाड़ में शामिल लोगों की पहचान कराने के लिए फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से निर्देश दिए गए हैं। एडीएम (प्रशासन) डॉ. एसके बरनवाल ने कहा, इस प्रकरण में शामिल लोगों की पहचान जरूरी है। तभी इसकी तह तक पहुंच सकेंगे। इसके लिए सभी प्रकार की जांच कराई जाएगी। डीएम सोनिका ने कहा, फोरेंसिक जांच के लिए लिखा है। इस जांच में कई अहम तथ्य सामने आएंगे। कई लोगों को चिह्नित किया जा सकेगा।

रिकार्ड रूम की प्रशासनिक जांच शुरू कर दी गई है। तीनों तहसीलों के रिकॉर्ड रूम सील करा दिए गए हैं। ताकि, कोई कर्मचारी अंदर न जा सके और जांच पूरी तरह से पारदर्शी हो।

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