खच्चरों की ‘लीद से पर्यटन मंत्री उपले बनाने का करेगे काम’ वाह रे वाह महाराज जी आपके ज्ञान को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने दी होगी दाद !

देहरादून।
उत्तराखंड की चारधाम यात्रा इस समय चरम पर है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा केदार और मां यमुनोत्री के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। लेकिन, आस्था के इन केंद्रों से इन दिनों एक ऐसी ‘महक’ आ रही है, जिसने शासन-प्रशासन की नाक में दम कर रखा है। जी हां, हम बात कर रहे हैं केदारनाथ और यमुनोत्री पैदल मार्ग पर पसरी खच्चरों की लीद और उससे होने वाली भयंकर गंदगी की।
जनता त्रस्त थी, सवाल तीखे थे। लेकिन हमारे माननीय पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज जी ने इस समस्या का ऐसा ‘अभूतपूर्व और ऐतिहासिक’ समाधान निकाला है, जिसे सुनकर शायद आप भी अपना सिर पकड़ लेंगे!
‘मैदान जैसी उम्मीद मत रखो, ये पहाड़ है भाई!’
जब पत्रकारों ने मंत्री जी से पूछा कि महाराज, यात्रा मार्ग पर इतनी गंदगी क्यों है? खच्चरों की लीद से पैदल चलना दूभर हो गया है, तो मंत्री जी ने पहले तो हाथ खड़े कर दिए। उन्होंने साफ कह दिया—”भाई, ये पर्वतीय यात्रा है। यहां मैदानों जैसी सुविधाओं की उम्मीद मत रखिए। थोड़ी-बहुत गंदगी तो रहती ही है।”
यानी श्रद्धालु करोड़ों का टैक्स दें, देश-दुनिया से यहां आएं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर ‘पहाड़ की मजबूरी’ का रोना सुनें। गजब है भाई!
लेकिन रुकिए, महाराज सिर्फ समस्या बताकर चुप नहीं हुए। उनके पास एक ‘मास्टरप्लान’ भी है। उन्होंने घोषणा की है कि गाय के गोबर के बाद अब उत्तराखंड का पर्यटन विभाग खच्चरों की लीद से ‘उपले’ बनाने का काम करेगा! जी हां, आपने बिल्कुल सही सुना—खच्चरों की लीद के उपले! अब पर्यटन विभाग पर्यटकों को सुविधाएं देने के बजाय, शायद पहाड़ों पर उपले थापने की ट्रेनिंग शुरू करने वाला है।
तो क्या नितिन नबीन से महाराज को मिली ‘शाबाशी’?
अब इस बयान के बाद सियासी गलियारों में एक बड़ा दिलचस्प सवाल तैर रहा है। सवाल यह है कि क्या कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने अपना यह ‘लीद से उपले’ बनाने का क्रांतिकारी आईडिया उत्तराखंड बीजेपी के प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन के सामने कोर कमेटी या मंत्रिपरिषद की बैठक में रखा होगा?
जरा सोचिए, अगर महाराज ने यह सुझाव दिया होगा, तो राष्ट्रीय नेतृत्व और नितिन नबीन ने उन्हें कितनी बड़ी शाबाशी दी होगी! पीठ थपथपाते हुए कहा होगा—”वाह महाराज जी, क्या विजन है! केदारनाथ में गंदगी भी साफ और आत्मनिर्भर भारत के तहत उपले भी तैयार!”
मजाक से इतर, सवाल यह उठता है कि क्या देश के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक की सुध लेने के लिए सरकार के पास सिर्फ यही एक बेतुका फॉर्मूला बचा है? क्या आधुनिक तकनीकों, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट और बेहतर ड्रेनेज सिस्टम के दौर में भी हमारे मंत्री जी ‘उपले’ बनाने की सोच से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं?
खच्चरों की लीद से श्रद्धालु परेशान हैं, बदबू से बीमारियां फैलने का खतरा है, लेकिन सरकार इसे ‘पहाड़ की नियति’ मानकर उपले थापने की तैयारी में है।
इस ‘लीद पॉलिटिक्स’ और महाराज के इस बयान पर आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि उपले बनाने से चारधाम यात्रा सुगम हो जाएगी? गाय के गोबर के बाद अब खच्चरों की लीद से उपले बनाएगा उत्तराखंड पर्यटन विभाग! चारधाम यात्रा में गंदगी के सवाल पर मंत्री सतपाल महाराज का अजीबोगरीब बयान- ‘मैदान जैसी सुविधाएं नहीं मिल सकतीं, थोड़ी गंदगी तो रहेगी ही।’ क्या इस अनोखे आइडिया पर नितिन नबीन ने दी होगी शाबाशी?



