
देहरादून।
खाकी में छिपे इस ‘सच्चे कर्मवीर’ के अदम्य साहस और मानवीय संवेदनाओं पर ध्यान दो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी!
जब कोई जनसेवक अपने कर्तव्य को सिर्फ़ रोज़गार न मानकर निष्ठा, समर्पण और वफ़ादारी का संकल्प बना लेता है, तो सेवा और समाजसेवा का एक अद्भुत जज़्बा जन्म लेता है—और राजधानी देहरादून में तैनात यातायात उपनिरीक्षक विजय प्रसाद रतूड़ी इसकी प्रत्यक्ष मिसाल हैं।
चाहे चिलचिलाती धूप हो, मूसलाधार बारिश या कोरोना जैसी भीषण महामारी, उन्होंने हर परिस्थिति में अपने फ़र्ज़ को सर्वोपरि रखा है। चलती बस के सामने कूदकर बस के नीचे फँसे व्यक्ति की जान बचाना उनके अदम्य साहस को दर्शाता है, तो वहीं 500 से भी अधिक लोगों के खोए हुए वॉलेट व बैग ढूँढकर लौटाना उनकी ईमानदारी पर मुहर लगाता है; यहाँ तक कि लॉकडाउन के दौरान उन्होंने तपती धूप में अपनी ड्यूटी के साथ-साथ बाल्टी में पानी भरकर बेज़ुबां जानवरों की प्यास बुझाने का बेहद मानवीय कार्य भी किया। ऐसे निस्वार्थ, जाँबाज़ और संवेदनशील जवान के उत्कृष्ट कार्यों पर माननीय मुख्यमंत्री धामी जी आपका ध्यानाकर्षण अत्यंत आवश्यक है, ताकि खाकी की साख और मान बढ़ाने वाले इस सच्चे कर्मवीर को राज्य स्तर पर उचित सम्मान मिले और पूरे पुलिस महकमे में सेवा और कर्तव्यपरायणता की एक नई अलख जग सके।




