उत्तराखंड

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने दिए संकेत, मकर संक्रांति से हो सकती है दायित्व वितरण की शुरुआत

विभिन्न निगमों, प्राधिकरणों और आयोगों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के पदों पर भाजपा नेताओं को दायित्व देने की शुरुआत अगले वर्ष 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर्व से हो सकती है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने मंगलवार को मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में इसके संकेत दिए। उन्होंने कहा कि सरकार में दायित्व दिए जाने के संबंध में दो दौर की बैठक हो चुकी है।

जल्द ही प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम के साथ इस विषय को लेकर बैठक प्रस्तावित है। इसके बाद दायित्व वितरण के लिए संभावित कार्यकर्ताओं की सूची सरकार को सौंप दी जाएगी।

सौ से ज्यादा कार्यकर्ताओं की सूची तैयार

प्रदेश की धामी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के नौ माह पूर्ण कर चुकी है, लेकिन अभी तक दायित्व का वितरण नहीं हो पाया है। मार्च में सरकार का गठन होने के बाद से अलग-अलग कारणों से यह विषय टलता आ रहा है। यद्यपि, प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने इसके लिए कसरत शुरू की है और अब तक सौ से ज्यादा कार्यकर्ताओं की सूची तैयार की गई है।

हाल में दिल्ली और फिर देहरादून में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भट्ट की प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम के साथ बैठकें हो चुकी हैं। अब गौतम के साथ होने वाली अगली बैठक पर दायित्व की आस लगाए बैठे नेताओं की नजरें टिकी हैं।

माना जा रहा है कि मकर संक्रांति पर्व पर कुछ पार्टी नेताओं को दायित्व सौंपकर इसकी शुरुआत की जाएगी। मीडिया से बातचीत में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भट्ट ने इसके संकेत देते हुए कहा कि हमारा प्रयास यही है कि नववर्ष में शीघ्र दायित्व वितरण हो जाए।

आज घोषित होगी तीन जिलों की टीम

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि कोटद्वार समेत तीन सांगठनिक जिलों की टीम का अभी गठन नहीं हो पाया है। इस बारे में कसरत पूर्ण कर ली गई है और बुधवार को इन जिलों की टीमें घोषित कर दी जाएंगी। इसके अलावा भाजयुमो और ओबीसी मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा भी एक-दो दिन में कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि 10 जनवरी तक सभी मंडल इकाइयों का गठन कर दिया जाएगा।

जबरन मतांतरण रोकने को सख्त कानून

भट्ट ने उत्तरकाशी के पुरोला में हुई मतांतरण की घटना से संबंधित प्रश्न पर कहा कि ऐसी घटनाओं पर लगाम कसने के लिए धामी सरकार देश का सबसे सख्त कानून लाई है। इस प्रकरण के साथ ही इससे पहले सभी लंबित मामलों में इस कानून के अंतर्गत कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।

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